दोहरा खाता पद्धति (DOUBLE ACCOUNT SYSTEM)
दोहरा खाता पद्धति - एसी संस्थाएं जिनका समाज को सेवा प्रदान करने के व्यवसाय में एकाधिकार होता है, एसी संस्थाओं कि स्थापना संसद के विशेष अधिनियम द्वारा होती है | इन कंपनियों को जनोपयोगी संस्थाएं कहा जाता है | जैसे - बिजली आपूर्ति कंपनी, जल आपूर्ति कंपनी , रेलवे कंपनी, गैस आपूर्ति कंपनी आदि | इन संस्थाओं में पूँजी का बहुत बड़ा भाग विनियोजित होता है | यह पूँजी जनता कि होती है अतः यह आवश्यक है कि कंपनियाँ अपने लेखों का प्रस्तुतीकरण इस प्रकार से करे जिससे एक सामान्य व्यक्ति देखकर कंपनी कि वितीय स्थिति कि जानकारी प्राप्त कर सके | इसी उद्देश्य कि पूर्ति के लिए लेखों का प्रस्तुतीकरण एक विशेष पद्धति जिसे दोहरा खाता पद्धति कहते है के अंतर्गत किया जाता है |
इस पद्धति कि शुरुआत सबसे पहले 1868 में इंग्लैंड से हुई है और आज सम्पूर्ण विश्व में भारत सहित इसी पद्धति को अपनाया जाता है | यह लेखा करने कि कोई नई पद्धति नहीं है केवल मात्र लेखों के प्रस्तुतीकरण की एक विधि है इस पद्धति के अंतर्गत निम्न अंतिम खाते तैयार किये जाते है -
(1) REVENUE ACCOUNT - इस खाते में ऐसे आय व व्यय का लेखा किया जाता है , जिसका व्यापार से प्रत्यक्ष सम्बन्ध होता है | दूसरे शब्दों में व्यवसाय के संचालन से सम्बंधित आय एवं व्ययों का लेखा इस खाते में किया जाता है |
(2) NET REVENUE ACCOUNT - इस खाते का प्रारंभिक शेष सामान्यतया CREDIT होता है | इस खाते में एसी आय एवं व्ययों का लेखा किया जाता है , जिसका जिसका व्यापार से प्रत्यक्ष रूप से कोई सम्बन्ध नहीं होता है अर्थात व्यवसाय के गैर-संचालन से सम्बंधित आय एवं व्ययों का लेखा किया जाता है | जैसे - INTEREST ON DEBENTURES, PROVISION FOR TAX, DIVIDEND PAID, TRANSFER TO RESERVE आदी को लिखा जाता है | इस खाते का शेष GENERAL BALANCE SHEET में TRANSFER कर दिया जाता है |
(3) STATEMENT SHOWING RECEIPT & EXPENDITURE ON CAPITAL ACCOUNT - इस खाते में दो पक्ष होते है -
1. पूंजीगत व्यय
2. पूंजीगत प्राप्तियां
पूंजीगत व्यय पक्ष पर स्थाई संपत्तियां, अमुर्तवान संपतियां तथा कृत्रिम सम्पतियों को लिखा जाता है जबकि पूंजीगत प्राप्ति पक्ष पर SHARE CAPITAL, CAPITAL RESERVE, DEBENTURE, SECURED & UNSECURED LOAN आदि को लिखा जाता है | इस खाते का शेष GENERAL BALANCE SHEET में TRANSFER किया जाता है | इस खाते का निम्न प्रारूप है -
EXPENDITURE
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PREVIOUS
YEAR
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CURRENT
YEAR
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TOTAL
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RECEIPTS
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PREVIOUS
YEAR
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CURRENT
YEAR
|
TOTAL
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(4) GENERAL BALANCE SHEET - सामान्य चिट्ठे में सम्पत्ति पक्ष पर उन सम्पतियों को लिखा जाता है जो ऊपर CAPITAL ACCOUNT में शामिल नहीं की गई है तथा उन्ही दायित्वों को लिखा जाता है जो ऊपर CAPITAL ACCOUNT में शामिल नहीं किये गए है |
द्वि- खाता पद्धति के अंतर्गत स्थाई सम्पतियों के पुनर्स्थापन का व्यवहार (REPLACEMENT OF FIXED ASSETS UNDER DOUBLE ACCOUNT SYSTEM)
जब किसी संस्था द्वारा किसी पुरानी सम्पत्ति को हटाकर नई सम्पत्ति स्थापित कि जाती है, तो पुरानी सम्पत्ति खाते के शेष रहे अपलिखित मूल्य को P&L A/C में TRANSFER कर दिया जाता है | इस प्रकार पुरानी सम्पत्ति का खाता बंद हो जाता है | परन्तु द्वि-खाता पद्धति के अंतर्गत जब कोई सम्पत्ति अप्रचलन या अन्य किसी कारण से प्रयोग से हटा दी जाती है, तो पुरानी सम्पत्ति खाते को बंद नहीं किया जाता है, अपितु नई सम्पत्ति कि पुनर्स्थापन लागत का व्यवहार एक विशेष तरीके से किया जाता है | इस लागत को दो भागों में बाँटा जाता है -
1. आयगत व्यय
2. पूंजीगत व्यय
उपरोक्त दोनों की गणना निम्न प्रकार की जाती है -
STEP 1st
CALCULATION OF REVENUE CHARGES OR CURRENT COST
PARTICULAR
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AMOUNT
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AMOUNT
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MATERIAL (OLD RATIO)
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XX
|
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ADD – INCREASE
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XX
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XX
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LABOUR (OLD RATIO)
|
XX
|
|
ADD – INCREASE
|
XX
|
XX
|
OVERHEAD (OLD RATIO)
|
XX
|
|
ADD – INCREASE
|
XX
|
XX
|
REVENUE
CHARGES OR CURRENT COST
|
XX
|
STEP 2nd
CALCULATION OF CAPITAL EXPENDITURE
PARTICULAR
|
AMOUNT
|
REPLACEMENT COST (AS PER GIVEN)
|
XX
|
LESS – CHARGES TO REVENUE OR CURRENT
COST
|
XX
|
CAPITAL
EXPENDITURE
|
XX
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STEP 3rd
CALCULATION OF AMOUNT PAID FOR NEW ASSETS
PARTICULAR
|
AMOUNT
|
REPLACEMENT COST (AS PER GIVEN)
|
XX
|
LESS – VALUE OF MATERIAL REUSED
|
XX
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BANK
|
XX
|
पुनर्स्थापन के लिए निम्नलिखित जर्नल प्रविष्टियां की जाती है -
NOTE -
- यदि प्रश्न में ऐसा कहा गया कहा गया हो कि VALUE OF MATERIAL REUSED की राशि REPLACEMENT COST में शामिल नहीं है, तो सबसे पहले इसे जोड़ा जाएगा |
- यदि पुनर्स्थापन के कारण नई सम्पत्ति की क्षमता पहले से दोगुनी हो जाती है, तो REPLACEMENT COST का आधा भाग पूर्णतया पूंजीगत व्यय बन जाएगा |
- यदि सहायक सम्पत्ति बनाई जाती है अथवा विस्तार किया जाता है, तो सहायक सम्पत्ति पर किया गया व्यय पूर्णतया पूंजीगत व्यय होगा |
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