एक कंपनी अंशों के निर्गमन द्वारा विभिन्न प्रकार की सम्पतियों के लिए धन एकत्रित करती है | एक सार्वजनिक कंपनी को व्यापार प्रारम्भ करने से पूर्व 90% अंशों के लिए आवेदन प्राप्त करना आवश्यक होता है | इसे न्यूनतम अभीदान कहा जाता है | ख्याति प्राप्त कंपनी की दशा में यह जोखिम और भी अधिक रहता है कि यदि न्यूनतम अभिदान के बराबर आवेदन प्राप्त नहीं हुवा तो बाजार में कंपनी की प्रतिष्ठा ख़राब होगी | नई कंपनी की दशा में यह जोखिम और भी अधिक रहती है | एसी दशा में इस बात की आवश्यकता होती है की कोई व्यक्ति अथवा व्यक्तियों का समूह इस बात की जिम्मेवारी ले की जनता द्वारा न्यूनतम अभिदान के बराबर अंशों के आवेदन न करने पर एसा व्यक्ति अथवा व्यक्तियों का समूह शेष अंशों को खरीद लेगा | इस व्यक्ति अथवा व्यक्तियों के समूह को अभिगोपक कहते है और इस अनुबंध को अभिगोपन कहते है |
अभिगोपन का कार्य बहुत ही जोखिमपूर्ण होता है क्योंकि यदि जनता द्वारा आवेदन नहीं किया जाता है, तो शेष सभी अंश अभिगोपक को खरीदने पड़ते है | अभिगोपक वे होते है जो कंपनी के अंशों के अभिदान के सम्बन्ध में गारंटी देते है | अभिगोपक एक व्यक्ति, व्यक्तियों का समूह, फर्म या कंपनी के रूप में हो सकते है | अंशों अथवा ऋणपत्रों के अभिगोपन का आशय एक कंपनी एवं अन्य किसी व्यक्तियों के मध्य किए गए es अनुबंध से है, जिसके द्वारा एक व्यक्ति अथवा व्यक्तियों का समूह एक निश्चित कमीशन के बदले कंपनी को यह गारंटी देता है की जनता द्वारा पूर्ण अभिदान न करने पर शेष अंश वे स्वयं खरीद लेंगे | अभिगोपन अनुबंध कंपनी की समस्त पूंजी अथवा उसके किसी भाग के लिए हो सकता है |
अभिगोपकों के दायित्व का निर्धारण करना
Calculation of Liability of Underwriters
Calculation of Liability of Underwriters
Particular
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A
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B
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Total
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Gross Liability
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xx
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xx
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xxxx
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Less – Marked Shares
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xx
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xx
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xxxx
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xx
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xx
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xxxx
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Less – Unmarked Shares
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xx
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xx
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xxxx
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Balance of Liability
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xx
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xx
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xxxx
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Less – Surplus Transferred to Other Underwriters
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xx
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xx
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xxxx
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Net Liability
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xx
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xx
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xxxx
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Add – Firm Underwriting Shares
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xx
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xx
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xxxx
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Total Liability
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xx
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xx
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xxxx
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NOTE -
- यदि अचिन्हित अंशों को बांटने का आधार प्रश्न में दिया गया हो तो, उसी अनुपात में अचिन्हित अंशों को घटाया जाएगा |
- सूचना के अभाव में अचिन्हित अंशों को सकल दायित्व के अनुपात में बांट कर घटाया जाएगा |
- यदि किसी अभिगोपक के चिन्हित अंश सकल दायित्व से अधिक हो, तो उसे अचिन्हित अंशों का लाभ नहीं दिया जाएगा |
- फर्म अभिगोपित अंशों को चिन्हित माना जाए अथवा अचिन्हित माना जाए इसकी सूचना प्रश्न में दी जाएगी | सूचना के अभाव में प्रश्न को दो बार हल किया जाएगा प्रथम दशा में फर्म अभिगोपित अंशों को चिन्हित मानते हुए तथा दूसरी दशा में फर्म अभिगोपित अंशों को अचिन्हित मानते हुए |
- यदि चिन्हित तथा अचिन्हित अंशों को घटाने के बाद किसी अभिगोपक का दायित्व ऋणात्मक आ जाता है, तो उसके ऋणात्मक शेष के बराबर अंश, शेष अभिगोपकों में अनुबंध की शर्तों के अनुसार घटाया जाएगा | यदि अनुबंध न हुवा हो, तो सकल दायित्व के अनुपात में घटाए जाएँगे |
- यदि एक बार ऋणात्मक शेष का लाभ देने के पश्चात किसी अभिगोपक के शेष अंश ऋणात्मक हो जाते है, तो उपरोक्त प्रक्रिया को पुनः दोहराया जाएगा |
- यदि फर्म अभिगोपन के अंश, अभिगोपित अंशों के अतिरिक्त लेने का अनुबंध हो, तो अंत में फर्म अभिगोपित वाले अंशों को जोड़ दिया जाएगा और यदि फर्म अभिगोपन के अंश अभिगोपन अनुबंध में शामिल हो, तो उन्हें नहीं जोड़ा जाएगा |
- फर्म अभिगोपन अथवा सुद्रढ़ अभिगोपन - ख्याति प्राप्त कंपनियों की दशा में अभिगोपक यह चाहते है कि कंपनी उन्हें एक निश्चित मात्रा में अंश अवश्य ही जारी करे | फर्म अभिगोपन करके अभिगोपक कंपनी से यह अनुबंध करते है की कंपनी अभिगोपकों को एक निश्चित मात्रा में अंश अथवा ऋणपत्र अवश्य निर्गमित करे |
- अभिगोपन कमीशन अंशों के सम्बन्ध में निर्गमित मूल्य के 5% से अधिक नहीं हो सकता है जबकि ऋणपत्रों की दशा में कमीशन की दर 2.5% होती है | अभिगोपकों को कमीशन अभिगोपित राशि पर ही मिलता है |
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